Archive for the ‘Indian Democracy’ Category

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Milestone Education Review (The Journal of Ideas on Educational & Social Transformation)

ISSN:2278-2168

Year 07, No.02, October, 2016

Special Issue on “Ambedkar, Indian Society and Tribal Philosophy”

(Released on 21st November, 2016)

Chief-Editor: Desh Raj Sirswal

Download the issue from given link:

https://drambedkar125.wordpress.com/2016/11/22/special-issue-on-ambedkar-indian-society-and-tribal-philosophy/

                                                    Abstract

Religion is a deriving force for social change in India since ancient times. Although we boast about ancient Indian ideals of social stratification, which made a long lasting discrimination within society, and most of the times we do not do any justice to social-political life of a billion peoples. The study of the relation between religion and politics showed that this relation always made a problematic situation for the indigenous people and always benefitted invaders. The idea of the interface or mixing of religion and politics being problematic and potentially dangerous is a byproduct of the rise of secularism, often regarded as one of the hallmarks of modern society. The concept of social justice is an important concept for the social-political harmony in present times. Social justice denotes the equal treatment of all citizens without any social distinction based on caste, colour, race, religion, sex and so on. It means absence of privileges being extended to any particular section of the society, and improvement in the conditions of backward classes (SCs, STs, and OBCs) and women. Social justice is a public and collective good that involves an equitable sharing of the earth’s power, resources and opportunities to enable people individually and collectively to develop their talents to the fullest. Its realisation requires social relations embedded in trust, acceptance, mutuality, reciprocity and solidarity. Under Indian Constitution the use of social justice is accepted in wider sense, which includes social and economical justice both. Ancient social structure allows us to see the discrimination made to indigenous people with reference to their socio-political life. These evils not only effects Hindu social order rather it also haunts the social structure of newly established religions in Indian continent. The objective of this paper is to disuses the role of religions in imparting social justice to Indian socio-political structure of our society. First we will see the place of religion in society then sees its effect on socio-political order whether it is affirmative or negative which allow us to make any rational conclusion.

Key-Words: Religion, Indian Society, Social Justice, Social Inclusion and Indian Constitution

Note:

To be presented at National Seminar on Social Security and Social Inclusion for Inclusive Growth in India,  PG Department of Economics and PG Department of Sociology, PGGCG-11, Chandigarh to be held on 5th August 2016.

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Yesterday’s Reflection:
स्वतन्त्रता दिवस हम सभी के मन में उमंग और जोश भर देता है। साल के कुछ चुनिंदा दिनों को छोड़ कर हम देशभक्ति या देशप्रेम को एक तरफ रख देते हैं। भारतीयता की भावना सभी में बराबर होती है लेकिन हममे से कुछ एक ऐसे भी हैं जो मानवधिकार या अम्बेडकरवाद की बात करते हैं उनको देश द्रोही या समाज के लिए खतरनाक मानते हैं और भगवा संस्कार के लोगों और नेताओं को भारतीय समाज में आदर्श के रूप में स्थापित करने की कोशिश करते हैं। लेकिन वो ये भूल जाते हैं की भारतीय समाज में ज्यादातर सामाजिक बुराईयों का मूल कारण यही है।
डॉ. अम्बेडकर, मार्क्स और भगतसिंह के विचारों को जिस दिन हम पूरी तन्मयता से लागू करने के लिए संघर्षरत होंगे तभी हम अपने देश को इन काले अंग्रेजों के कहर से बचा सकते हैं और वास्तविक स्वतंत्रता को समाज में वास्तवरूप में देखेंगे। संसद लोकतन्त्र की बजाए समाजिक लोकतन्त्र हमारी आवश्यकता है।
आप सभी देशवासियों को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाई। अपने देश में स्वतन्त्रता ,समानता और भ्रातृत्व की सोच साकार हो।
जय भारत।

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सामाजिक एकता, सामाजिक समानता और भ्रातृत्व के पक्षधर, ज्ञान के प्रतीक, भारतीय लोकतन्त्र के प्रणेता, दलितों के मसीहा, भारत में बुद्ध धर्म के पुनरुद्धार करने वाले प्रबुद्ध विचारक, शिक्षाशास्त्री और समकालीन दार्शनिक भारत रत्न डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के जन्मदिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई। बाबा साहेब का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

यह एक अच्छा संकेत है की दिन प्रति दिन डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के चिन्तन का प्रसार हो रहा है और लोग ज्यादा से जायदा उनसे जुड़ने लगे है बेशक भारतीय सरकारें अब तक यही प्रयास में रही हैं की उनके चिन्तन को लोगो तक न पहुँचने दिया जाये . कभी उनको गाँधी में व्यस्त रखा तो कभी धर्म के बंटवारे में डाल दिया. बाबा साहेब का चिन्तन इन सब संकीर्णताओं से विमुक्त है और तभी यह हम सबको  सही प्रेरणा देने में सक्षम भी है .

वर्तमान भारतीय समाज में साम्प्रदायिक ताकतें अपने चरम पर हैं वो अम्बेडकर चिन्तन को सिरे से नकारने और आलोचना में व्यस्त हैं.कुछ मुर्ख तो यह  भी कहते हैं की  आंबेडकर अनुयायी बाबा साहिब के दर्शन को नहीं समझ सके. उन मूर्खों को कौन समझाये की बाबा साहेब के चिन्तन में आपको वो कमियां नहीं मिलेगी जिससे आप उनको भी हिन्दू मानसिकता का पैरोकार बना सके. ज्यादतर समाज सुधारकों के साथ यही किया जाता है की उनके विचारों को तोड़ मरोड़  कर पेश करके  उनको हिन्दू धर्म का नुमायन्दा बना देते हैं.

साथियों अगर हमे डॉ अम्बेडकर के चिन्तन को आगे बढ़ाना है तो इन मानसिक संकीर्णता से ग्रस्त लोगों की बातों, आलोचनाओं, अंधविश्वासों से अपने चिन्तन को मुक्त रखना है. भारतीय संविधान के मुख्य अंगों को ही ये संप्रदायिक लोग अपने ढंग से बदलने की कोशिश में लगे हैं लेकिन एक बात समझ लो की यह भारतीय संविधान की ही गरिमा है की  आज हम लोग आजादी की साँस ले रहे है, बच्चों को पढ़ा रहे हैं और समाज के हर एक तबके चाहे वो दलित हों या महिलाएं , को  समान अधिकार मिले हैं.

वर्तमान में सामाजिक बुराईयों के लिए हिंदूवादी मानसिकता, निक्कमे नेता और लचर न्याय पालिका जिम्मेवार है जिसको पैसे वाले लोग और तथाकथित उच्च वर्ग के लोग अपने फायदे के लिए ही इस्तेमाल करते हैं. भारतीय संविधान हमे हर अन्याय से मुक्ति दिलाने में सक्षम है बीएस कमी यही है की हम उसको सही ढंग से भारत में प्रयोग के लिए लगातार संघर्ष करे अन्यथा बाद में सिर्फ पछतावा हाथ लगेगा और भारतीय समाज दोबारा हजारों साल पहले की संकीर्ण सोच में बदल जायेगा और जिसका प्रचार आजकल बड़े स्तर पर सरकार और मीडिया द्वारा किया जा रहा है.

अगर सरकार वास्तव में देश का भला चाहती है तो हर अंधविश्वास को खत्म करने का बीड़ा उठाये न की उसे बढ़ाने का और साथ संविधान की गरिमा बढाये न की  संविधान में दिए गये अधिकारों से दलितों, ओरतों, आदिवासियों को महरूम रख कर उसे असामनता और अन्याय का जीवन दे . बाबा साहेब का संघर्ष तभी सफल होगा जब हम सामाजिक लोकतंत्र को भारतीय समाज की हकीकत बना सके और इसके लिए लगातार संघर्ष को जमीनी हकीकत की आवश्यकता है.

जय भीम, जय भारत

यहाँ पर कुछ चित्र एक कार्यक्रम जोकि महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ अम्बेडकर जी का जन्मदिवस महाऋषि वाल्मीकि शिक्षा प्रचार समिति गांव मांडी (पानीपत) द्वारा मनाया गया। बच्चों ने विभिन्न प्रस्तुति दी और कार्यक्रम में जीवन्त बना दिया। इसी तरह के प्रयास ही हमे आगे ले जायेंगें :

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प्रिय साथियों
बड़ा दुःख का विषय है की भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. क्या किसी को भी अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है. भारत में आर्य-अनार्य, सुर -असुर का विवाद शुरू से रहा है.  भारत में नंगी और हिंसक प्रवृति की  फिल्मों और किताबों के ऊपर कभी भी बैन नहीं लगाया जा रहा हैं . और तो और आतंकवाद से देश खत्म हो रहा है इसका हमारे नेताओं को संज्ञान नहीं है . लेकिन जातिवाद, कर्मकांड और हिंसा का पक्ष लेने का सबको समय और अधिकार है .  टीवी कार्यक्रमों में अन्धविश्वास को फ़ैलाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता और ना ही खाप पंचायतों द्वारा कानून का उल्लंघन दिखाई देता है. दलितों की बहु बेटियों को सरेआम नंगा किया जाता है, बलात्कार किया जाता है और घर तक जला दिए जाते हैं, धर्म के नाम पर दंगे करवाए जाते हैं और भ्रष्टाचार फैलाया जाता है, साथ ही मीडिया बिकता है तो किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगती . पैसे के दम पर बलात्कारी और भ्रष्टाचारी  कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. पर हम संवेदनहीन  हो गये हैं . हाँ चिन्तन को खत्म करने की कोशिश जरुर की जा रही है और इस पर हम ठहाके मार रहे है .
Today is the black day for socalled Indian Democracy as an honest person is being pulled out because he proved that Congress and BJP are so corrupt that they destroyed India and common man. It will be shameful for those who supports parties like Congress and BJP. They showed there evil side by oppossing public interest bill. All the Best Arvind Kejrival, you are a true Youth ICON for India.
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Views of Arvind Kejrival today:
BJP & Congress united to prevent the Janlokpal from being tabled. What happened in the Delhi assembly was there for the nation to see. The Delhi cabinet has decided to resign.
दोस्तों आज से दो महीने पहले हम ऐसे ही इकट्ठा हुए थे. आठ दिसंबर …को जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीज़ों की घोषणा हुई थी तब हम लोग यहीं इकट्ठा हुए थे. इसी खिड़की से मैंने सबको संबोधित किया था. हमने 28 सीटें जीती थी और हमें भरोसा नहीं था कि हमारी सरकार बनेगी.
हमने कसम खाई थी कि हम कांग्रेस और बीजेपी का समर्थन नहीं लेंगे. लेकिन कांग्रेस ने जबरदस्ती समर्थन दिया. हमने जनता से पूछकर सरकार बनाई. 28 दिसंबर को हमने सरकार बनाई और शपथ ली. हमारा सबसे बड़ा वादा था कि हम जनलोकपाल बिल पास करेंगे. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून बनाएंगे.
लेकिन आज विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश करने की कोशिश की गई तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियाँ मिल गईं. आज तक भारत के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ. सभी को यह तो पता है कि बीजेपी और कांग्रेस पर्दे के पीछे मिलते हैं और देश को मिलकर लूट रहे हैं लेकिन पिछले दो दिन में ये खेल भी सबके सामने आ गया. आज दोनों पार्टियों ने जनलोकपाल बिल विधानसभा में पेश ही नहीं होने दिया.
इन्होंने जनलोकपाल बिल गिरा दिया. ऐसा क्यों हैं? क्योंकि अभी तीन दिन पहले हम लोगों ने मुकेश अंबानी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ की है. वीरप्पा मोइली के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ की है. मुकेश अंबानी वो सख़्श हैं जो इस देश की सरकार चलाते हैं. मकेश अंबानी ने कहा है कि कांग्रेस मेरी दुकान है मैं जब चाहूँ ख़रीद सकता हूँ. यूपीए की सरकार को पिछले दस साल से मुकेश अंबानी चला रहे थे और पिछले एक साल से मोदी जी को चला रहे हैं.
मोदी के पास इतना पैसा कहां से आता हैं. हेलीकॉप्टर से घूमते हैं, इतनी बड़ी बड़ी रैलियाँ करते हैं? पैसा आता है क्योंकि मुकेश अंबानी उनके पीछे हैं. जैसे ही हमने मुकेश अंबानी पर हाथ रखा ये दोनों एक हो गए. इन्होंने जनलोकपाल पास नहीं होने दिया क्योंकि इन्हें लगा कि अभी केजरीवाल के छोटी सी एसीबी है तो नाक में दम कर रखा है यदि जनलोकपाल आ गया तो आधे से ज़्यादा नेता जेल चले जाएंगे.
इसलिए दोनों पार्टियों ने मिलकर जनलोकपाल बिल गिरा दिया. इन्हें ये भी डर था कि यदि सरकार चलती रही तो अभी तो मुकेश अंबानी और मोइली को ही पकड़ा है थोड़े दिनों में शरद पवार की भी बारी आ सकती है. दोस्तों, मैं बहुत छोटा आदमी हूँ. मैं यहाँ कुर्सी के लिए नहीं आया हूँ. मैं यहाँ जनलोकपाल बिल के लिए आया हूँ. आज लोकपाल बिल गिर गया है और हमारी सरकार इस्तीफ़ा देती है.
मैं मांग करता हूँ कि दिल्ली विधानसभा को बर्खास्त किया जाए और दिल्ली में तुरंत चुनाव करवाए जाएं. लोकपाल बिल के लिए सौ बार मुख्यमंत्री की कुर्सी न्यौछावर करने के लिए तैयार हैं. मैं इस बिल के लिए जान भी देने के लिए तैयार हूँ. अभी अभी हमारी कैबिनेट मीटिंग हुई थी और हमारी कैबिनेट ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि हमारी सरकार आज इस्तीफ़ा देती है.
28 दिसंबर और उसके बाद से हमारे सात के सात मंत्री आज तक ठीक से सोए नहीं हैं. हम रात दिन काम कर रहे थे. हमने दिल्ली वालों के लिए काम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. हमने पूरी साफ़ नियत और ईमानदारी से काम करने की कोशिश की. हो सकता है हमसे ग़लतियाँ हुई हों. हम भी इंसान हैं. लेकिन हमने पूरी ईमानदारी से कोशिश की.
ये लोग कहते हैं कि हमसे गवर्नेस करनी नहीं आती. पाँच साल में बीजेपी और कांग्रेस वाले बिजली कंपनियों का ऑडिट नहीं करवा पाए हमने पाँच दिन में करवा दिया. हमने शीला दीक्षित के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ की. हमने मुकेश अंबानी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ की. हम भी अगर करोड़ों रुपए खा लेते और थोड़े से बीजेपी और कांग्रेस वालों के फेंक देते तो ये कहते कि बड़ा अच्छा काम चल रहा है. दोस्तों कल जो कुछ संसद और विधानसभा के अंदर हुआ है उससे मन बहुत खट्टा हो गया.
कल संसद में इन्होंने मिर्ची पाउडर फेंका, विधानसभा में मेरा माइक तोड़ दिया. हमारे एक मंत्री को चूड़ियाँ दी. हमारे काग़ज़ फेंक दिया. चूड़ियाँ देने का मतलब क्या है? क्या ये बीजेपी वाले महिलाओं की इज्ज़त नहीं करते. बड़ी बड़ी बातें करते हैं. विधानसभा को मंदिर बताते हैं लेकिन मैं पूछता हूँ कि मंदिर में मूर्तियाँ तोड़ते हो क्या, मस्जिद में कुरान फ़ाड़ते हो क्या? शर्म आती है मुझे.
बीजेपी वालों ने विधानसभा और संसद दोनों को शर्मसार कर दिया. हम जो भी काम करते हैं ये उसे असंवैधानिक बताते हैं. मुकेश अंबानी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की तो मोइली ने असंवैधानिक बता दिया. हम जनलोकपाल लाए तो बिल को असंवैधानिक बता दिया. मैंने भी संवीधान पढ़ा हैं. कहीं नहीं लिखा कि हमें विधानसभा में बिल प्रस्तुत करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति चाहिए.
क्या केंद्र सरकार अंग्रेज़ों की सरकार है और दिल्ली के उपराज्यपाल उनके वॉयसराय हैं? हम नहीं बात मानते केंद्र सरकार की. हम संविधान की बात मानेंगे और उसके लिए अपनी जान तक देने के लिए तैयार हैं. इस देश की जनता ने अब आज़ादी की खुशबू लेनी है और अब जनता चुप नहीं बैठेगी. मैं अब यहाँ से सीधा उपराज्यपाल के पास जा रहा हूँ और भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि हम बहुत छोटे लोग हैं. भगवान हमें सद्बुद्धि दे और देश के लिए जान कुर्बान करने का मौक़ा दे.
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दोस्तों,
एक बात तो शर्तिया है…. इस मुल्क में अब जब भी इतिहास लिखा और पढ़ा जायेगा तो बीजेपी को दिल्ली में उसके द्वारा निभाई गयी विपक्ष की भूमिका का जवाब तो देना ही पड़ेगा…
और ये सवाल हमेशा बीजेपी को देना भारी पड़ेगा..
आज जिस कांग्रेस के चक्कर में फंसकर बीजेपी ने अपनी जग-हंसी करवाई है दिल्ली विधानसभा में जन लोकपाल का तीव्र विरोध करके , तो उसे अंदाज़ा ही नहीं कि कांग्रेस उसे ने दिल्ली में बर्बाद कर दिया है और उसे इल्म तक नहीं हुआ….
कांग्रेस खुद तो दिल्ली विधान सभा चुनावों …में बर्बाद होकर मटियामेट हो ही चुकी थी और उसे किसी भी तरह से “आप” को राष्ट्रीय पटल पर आने से रोकना था और साथ ही साथ उसे बीजेपी का भी मुखोटा दिल्ली और देश की जनता के सामने लाना था…..
उसने जनता के फैसले के नाम पर “आप” को बिना-मांगे समर्थन दिया और उसे सरकार बनाने के लिए सोचने पर मजबूर किया….बीजेपी ने भी कांग्रेस की हाँ में हाँ मिलाते हुए “आप” को सरकार बनाने के लिए बार-बार चुनौती दी और इस तरह “आप” की सरकार बनी…..
पर जिस तरह से बीजेपी ने हर बात पर नकारात्मक राजनीती की, सरकार के हर काम में अडंगा डालने की कोशिश की, सरकार के खिलाफ एक बेबुनियाद और बे सिर-पैर का प्रोपेगंडा चलाया, उससे बीजेपी खुद विकास-विरोधी और भ्रष्टाचारियो के साथ खड़ी दिखाई दी…और यही कांग्रेस चाहती थी….
बीजेपी को लग रहा था कि वो दिल्ली की राजनीती चला रही है…..पर उसके बड़े-बड़े विद्वान् नेता शायद भूल गए कि कांग्रेस उसे कठपुतली की तरह इस्तेमाल करके उससे ये सब करवा रहे थे और बीजेपी के नेता वो सब कर भी रहे थे…
अब साफ़ है कि दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही तकनीकी तौर पर बहाना बनाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकप्रिय और जनप्रिय “जन लोकपाल” के विरोध में हैं…..वो नहीं चाहते कि दिल्ली में कांग्रेस की सरकार के काले कारनामों और बीजेपी के MCD में खुली लूट की कोई जांच भी हो….
कांग्रेस और बीजेपी अपनी खाल बचाना चाहती है…..दोनों पार्टियाँ संविधान की आड़ लेकर अपने काले कारनामों को छुपाना चाहती हैं….किसका बेवकूफ बना रहे हैं श्रीमान जी ?? इन्ही क़ानूनी और संवेधानिक दाँव-पेंचों में उलझा कर ही तो इस देश का बर्बाद कर डाला है इन पार्टियों ने….अपनी बारी में तो कांग्रेस ने इसी दिल्ली विधानसभा में 13 बिल पास किये थे बिना किसी केंद्र की मंजूरी लिए…तो अब क्या सांप सूंघ गया इन्हें ?????
http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/sheila-govt-passed-13-bills-without-centres-nod/article5675661.ece
अब जो थोड़ी बहुत इज्ज़त और समर्थन मुहाने पर बैठे नागरिकों और वोटर्स के दिल में बीजेपी की थी वो आज तार-तार हो गयी होगी…..उसके घिनोने षड्यंत्र बेनकाब हो गए….
बीजेपी की तो ये सवाल हमेशा बीजेपी को देना भारी पड़ेगा…..दिल्ली की जनता को भी और देश की जनता को भी…..दिल्ली में खलनायक का उसका रोल सबने देखा है…..
अब “आप” की सरकार रहे या ना रहे..पर एक बात तो साफ़ है—-अब आगे दिल्ली की जनता को चुनना है कि वो क्या चाहती है और किसके साथ खड़ी है ????????????
क्या चाहती है दिल्ली की जनता—-कि उसके हक, उसके अधिकारों, उसके सपनों, उसके अरमानों को पूरा उसके द्वारा चुनी मजबूत सरकार करे या फिर वो सरकारें जो दिल्ली की जनता को लूटने के समय तो खुद आगे आ जाती हैं और जब दिल्ली की जनता के कल्याण की बात आती है तो कानून और संविधान के नाम पर केंद्र और उप-राज्यपाल को आगे करके जनता को बेवकूफ बनाते हैं ??????
04 दिसंबर को भी दिल्ली की जनता ने इतिहास बनाया था और ये भी दीगर है कि इस देश की राजनीती को नयी दिशा भी दिल्ली की जनता ही देगी…
और रही बात “आप” की तो किसी शायर ने क्या खूब कहा था कभी—
“हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता बन जायेगा”…………
जय हिन्द !! वन्दे मातरम !!
डॉ राजेश गर्ग.