लोकतान्त्रिक अधिकारों के संघर्ष में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का योगदान

Posted: मार्च 4, 2015 in Dalit Liberation, Dalit Studies, Dr. B.R.ambedkar

ambedkar

लोकतान्त्रिक अधिकारों के संघर्ष में डॉ.  भीमराव अम्बेडकर का योगदान

(Dr. Bhimrao Ambedkar’s  Contribution  in the Democratic Rights Struggle)

डॉ. देशराज सिरसवाल

शोध-सारांश

लोकतान्त्रिक अधिकारों की प्राप्ति का प्रश्न वर्तमान समय का महत्वपूर्ण और प्रसांगिक  प्रश्न बन चुका है. देश के भौतिक और आर्थिक विकास की कीमत आम लोगों के लोकतान्त्रिक अधिकारों के हनन के द्वारा दी जा रही है. वर्तमान परिस्थितियाँ किसी सम्भावित सामाजिक क्रांति की ओर हमें अग्रसर कर रहीं है. पिछली शताब्दी की जिस सामाजिक क्रांति की बदौलत भारत में आज हम स्वतन्त्रता, समानता और भ्रातृत्व की बात करते है, उसमे साहूजी महाराज, ज्योतिबा फुले,नारायण गुरु और डॉ आम्बेडकर का बहुत बड़ा योगदान  रहा है । इन तमाम महापुरुषों के संघर्षो के परिणाम स्वरूप ही  हमे  बोलने की, लिखने की, अपनी मर्ज़ी से पेशा चुनने की, संगठन खड़ा करने की, मीडिया चलाने की आज़ादी  मिली है अन्यथा  जातिगत भेदभाव को गलत नहीं माना जाता, छुआ-छुत को कानून में अपराध घोषित नहीं किया जाता, स्त्री स्वतंत्रता की बात कौन करता। राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतान्त्रिक अधिकारों के संघर्ष पर हमे बहुत कुछ पढने और सुनने को  मिलता है लेकिन जब भी हम भारत के विद्वानों की तरफ देखते हैं तो आमतौर पर डॉ. अम्बेडकर जी को केवल दलितों के मसीहा और संविधान का रचियता भर  कह कर बात खत्म कर दी जाती है. डॉ. आंबेडकर प्रत्येक नागरिक की मुलभूत  आवश्यकताओं की पूर्ति किसी भी लोकतन्त्र का प्रथम कर्तव्य मानते थे। वे साम्राज्यवाद और पूँजीवाद के खुले विरोधी थे। उनकी सोच में कार्ल मार्क्स और गौतम बुद्ध के विचारों का अदभुत समन्वय है। चाहे हम इसे लोकतान्त्रिक अधिकार कहें या मानवाधिकार कहें. डॉ अम्बेडकर जी ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके सामाजिक योगदान को हम नकार नहीं सकते क्यूंकि उनके विचारों और संघर्ष का प्रभाव आज हम भारतीय समाज पर निर्विवाद देख सकते हैं. प्रस्तुत लेख का उद्देश्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के योगदान को वर्तमान लोकतान्त्रिक अधिकारों के संघर्ष के इतिहास के सन्दर्भ में अध्ययन करना है.

Note:

To be presented at National level Seminar on the theme” Dr. B.R. Ambedkar Views on Social Justice, Caste based discrimination and Dalit Identity”.being organized by Ambedkar Centre and Centre for the Study of Social Exclusion and Inclusive Policy, on 27-28 March, 2015 at Panjab University, Chandigarh.

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