डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को उनके परिनिर्वाण दिवस पर सत सत नमन…….

Posted: दिसम्बर 5, 2014 in Ambekdar Books, Dalit Studies, Dr. B.R.ambedkar

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अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेँ मुख्य दरवाजे के अंदर कि ओर डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकर का फोटो लगाया हुआ है ! वहाँ ऐसा लिखा है ,”हमे गर्व है कि , ऐसा छात्र हमारी यूनिवर्सिटी से पढकर गया है .. और उसने भारत का संविधान लिखकर उस देश पर बड़ा उपकार किया है !” कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 300 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मेँ , पूरे 300 सालोँ मेँ इस यूनिवर्सिटी से सबसे होशियार छात्र कौन रहा? इसका सर्वे किया गया उस सर्वे मे 6 नाम सामने आए , उसमे नं. 1 पर नाम था डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकर का !

डॉक्टर बाबासाहाब आंबेडकर के सम्मान मेँ कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मुख्य दरवाजे पर उनकी कांस्य प्रतिमा लगायी गयी , उस मूर्ती का अनावरण अमेरिकन राष्ट्रपती बराक ओबामा के करकमलोँ से किया गया ! उस मूर्ती के नीचे लिखा गया है ,” सिम्बॉल ऑफ नॉलेज” यानि ज्ञान का प्रतीक” सिम्बॉल ऑफ नॉलेज ” — डॉ. भीमराव अंबेडकर जी !!

उनके द्वारा प्रस्तावित नियमों के कारण ही आज दलित सम्मान के साथ जी रहे हैं और समाज की मुख्य धारा में योगदान दे रहे हैं. उनके योगदान को प्रकट करता एक कटाक्ष है , जो की सोशल ग्रुप्स पर आजकल छाया हुआ है :

आरक्षण नहीं था तो देश
तरक्की की राह पर था, किन्तु
आरक्षण के आते ही कलियुग शुरू हो गया..
आरक्षण नहीं था तो हनुमान बिना बटर के सूरज
को खा जाता था, ब्रह्मा हाथ, पाँव, मुह से
बच्चे
पैदा करता था, मुख में प्रिंटिंग प्रेस रखते थे, वेद
प्रिंट होकर
निकलते थे, शिव चंद्रमा को हेयर-बैंड की तरह
चोटी में बांधे रखता था, विष्णु उस समय के
स्लीपवेल वाले बैड यानी नाग पर सोता था,
कृष्ण यूँही साइंस के प्रयोग करते करते
रासलीला करता था, राम पत्थर को पाँव
लगाकर उसे
महिला का रूप दे देता था, गणेश
बिना पेट्रोल के चलने वाले
वाहन चूहे की सवारी करते
थे…..विकाश जोरो पर था,
प्रगति हो रही थी…
किन्तु नाश जाए इस मुए आरक्षण का, आते
ही देश
की तरक्की रुकवा दी..

संविधान के 64 साल पहले छुआछूत को खत्म करने के बावजूद भारत में यह बेशर्मी से जारी है। एक अध्ययन में पता चला है कि हर चौथा भारतीय छुआछूत को मानता है और इसे मानने वालों में हर धर्म और जाति के लोग शामिल हैं।  पूरी खबर पढ़े:
संविधान छुआछूत को 64 साल पहले ही खत्म कर चुका है लेकिन लोगों के मन में आज भी यह कुप्रथा बसी हुई है। एक चौथाई से ज्यादा भारतीय छुआछूत मानते हैं और अपने घरों में किसी न किसी रूप में इसका पालन करते हैं।

नैशनल काउंसिल ऑफ अप्लाईड इकनॉमिक रीसर्च (NCAER) और अमेरिका की मैरिलैंड यूनिवर्सिटी ने एक अध्ययन में पाया कि हर चौथा भारतीय छुआछूत को मानता है। छुआछूत मानने वालों में हर धर्म और जाति के लोग शामिल हैं।

यह सर्वे भारत भर के 42000 घरों में किया गया। लोगों के जवाबों से पता चलता है कि छुआछूत मानने वालों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण हैं, उसके बाद ओबीसी हैं। छुआछूत सबसे ज्यादा हिंदुओँ, सिखों और जैनियों में पाई गई।

1956 में स्थापित NCAER भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी स्वतंत्र संस्था है जो आर्थिक मामलों में रीसर्च करती है। 2011-12 में इसने देश का सबसे बड़ा गैर सरकारी सर्वे किया था। इसी सर्वे के नतीजों में यह बात सामने आई है कि भारत में छुआछूत किस हद तक घर-घर में फैली है। इस सर्वे के पूरे नतीजे 2015 तक आ पाएंगे।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में छापी खबर में बताया है कि सर्वे में पूछा गया कि क्या आपके परिवार में कोई छुआछूत को मानता है। अगर इस सवाल का जवाब नहीं है, तो दूसरा सवाल था – क्या आप अपने किचन में अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति को आने देंगे या उसे अपने बर्तन इस्तेमाल करने देंगे?

भारतभर के 27 फीसदी लोगों ने पहले सवाल का जवाब हां में दिया। हां कहने वालों में सबसे ज्यादा 52 फीसदी ब्राह्मण थे। 24 फीसदी कथित ऊंची जाति के गैर ब्राह्मण थे। (स्त्रोत: http://navbharattimes.indiatimes.com/india/biggest-caste-survey-one-in-four-indians-admit-to-practising-untouchability/articleshow/45318395.cms)

ऐसे में डॉ भीम राव अम्बेडकर जी आज भी जीवंत हो उठते हैं . सामाजिक न्याय के संघर्ष में उन जैसा कोई नहीं है जो हमारा मार्गदर्शन करे.डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को  उनके परिनिर्वाण दिवस  6 दिसम्बर पर सत सत नमन…….

जय भीम . जय भारत.

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