‘महिषासुर’ -प्रमोद रंजन

Posted: अक्टूबर 29, 2014 in प्रमोद रंजन, महिषासुर, Dalit Liberation, Dalit Studies, Human Rights, Indian Democracy, Social Philosophy
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प्रिय साथियों
बड़ा दुःख का विषय है की भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. क्या किसी को भी अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है. भारत में आर्य-अनार्य, सुर -असुर का विवाद शुरू से रहा है.  भारत में नंगी और हिंसक प्रवृति की  फिल्मों और किताबों के ऊपर कभी भी बैन नहीं लगाया जा रहा हैं . और तो और आतंकवाद से देश खत्म हो रहा है इसका हमारे नेताओं को संज्ञान नहीं है . लेकिन जातिवाद, कर्मकांड और हिंसा का पक्ष लेने का सबको समय और अधिकार है .  टीवी कार्यक्रमों में अन्धविश्वास को फ़ैलाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता और ना ही खाप पंचायतों द्वारा कानून का उल्लंघन दिखाई देता है. दलितों की बहु बेटियों को सरेआम नंगा किया जाता है, बलात्कार किया जाता है और घर तक जला दिए जाते हैं, धर्म के नाम पर दंगे करवाए जाते हैं और भ्रष्टाचार फैलाया जाता है, साथ ही मीडिया बिकता है तो किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगती . पैसे के दम पर बलात्कारी और भ्रष्टाचारी  कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. पर हम संवेदनहीन  हो गये हैं . हाँ चिन्तन को खत्म करने की कोशिश जरुर की जा रही है और इस पर हम ठहाके मार रहे है .
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