सामाजिक न्याय और धर्म (डॉ. भीमराव आंबेडकर जयन्ती पर विशेष- 2014)

Posted: अप्रैल 14, 2014 in Dalit Liberation, Dalit Studies, Dr. B.R.ambedkar, Philosophy and Education

आंबेडकर जयंती

सामाजिक न्याय और धर्म (डॉ. भीमराव आंबेडकर जयन्ती पर विशेष- २०१४)

डॉ. देशराज सिरसवाल

भारतीय समाज में हम आजकल जो सबसे बड़ी समस्या है वह विचारधारा की कमी है जो की हमे समग्र विकास की तरफ ले जाये और सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार करे . सामाजिकन्याय  सेअभिप्रायऐसीसामाजिकव्यवस्थाकाहोनाहै , जिसमेंबिनाकिसभेदभावकेप्रत्येकव्यक्तिकोसमानअवसरऔरसमुचितसंसाधनप्राप्तहों।  सामाजिकन्यायवस्तुत : सामाजिकसमानता, सामाजिकस्वतंत्रतातथासामाजिकसुरक्षाकायोगहै।  सामाजिकसमानतामेंधर्म, जाती, वर्ण , वर्ग , लिंगआदिसभीक्षेत्रोंकीसमानताअंतर्निहितहै।  सामाजिकसुरक्षासेमतलबएकहोरजहाँ  जीवनऔरसम्पत्तिकीसुरक्षासेहै , वहींदूसरीऔरदलित-शोषण , रुग्ण, वृद्ध , निर्बलऔरअसहायवर्गोंकीसुरक्षा, सहायतातथासुविधोपलब्धतासेभीहै।(१)

सामाजिकन्यायकोईअलगबातनहींबल्किसमाज-निर्माणकाहीअभिन्नअंगहै।न्यायकेबिनासमाजकीसंकल्पनाअधूरीहै।मानवाधिकारतथासमानताआधारबिंदुहैं।अंतर्राष्ट्रीयश्रमिकसंगठनकेसंविधानकेअनुसार- ‘‘सामाजिकन्यायकेबिनासर्वव्याप्तऔरअनंतशांतिकीप्राप्तिबेमानीहै।’’ सामाजिकन्यायदरअसलवैसेसमाजयासंगठनकोस्थापितकरनेकीअवधारणाहैजोसमानतातथाएकताकेमूल्योंपरआधारितहो , साथहीमानवअधिकारोंकेमूल्योंकोसमझेतथाप्रत्येकमनुष्यकीप्रतिष्ठाकोभीपहचाने। न्यायमूर्तिगजेंद्रगडकरकेशब्दोंमें-सामाजिकन्याय‘‘सामाजिकऔरआर्थिकगतिविधियोंमेंसभीकोसमानअवसरकीप्राप्तिऔरअसमानताकीसमाप्तिहै।’’(२)

विचारधारा की दरिद्रता

वर्तमान समय में जो भी विचारधाराएँ हमें देखने को मिलती हैं उनमें एक वैचारिक दरिद्रता देखने को मिलती है चाहे वह गांधीवाद हो, अम्बेडकरवाद हो या मार्क्सवाद हो.  इसका कारण क्या है ? एक कहानी यहाँ पर प्रासंगिक है : एक बार एक ईमानदार व्यक्ति था. वह हमेशा लोगों की भलाई के लिए काम करता था. शैतान के अनुयायियों ने बहुत कोशिस की उन्हें अच्छाई के मार्ग से हटाने की लेकिन वो नाकामयाब रहे. बाद में शैतान ने उन्हें सलाह दी की अगर उस भले आदमी को खत्म करना है तो उसके पीछे अनुयायी लगा दो . उन्होंने ऐसा ही किया.  इसी तरह भारत में भी हो रहा की कोई विचारधारा हों , उससे जुड़े लोग अपने फायदे को ज्यादा तवज्जों देते है और सामाजिक न्याय और विकास की प्रक्रिया में बाधा बन जाते हैं.  एक अन्य बिंदु यह है भी है की हर व्यक्ति विचारधारा को समग्रता से ग्रहण करने की बजाये अपनी सुविधा के अनुरूप अपनाता है और वैचारिक संकीर्णता का शिकार हो जाता है. जिसके कारण पूरी विचारधारा में अपंगता आ जाती है. ऐसा ही अम्बेडकरवाद के साथ भी हुआ है.

डा.भीमरावअम्बेडकरने स्वतंत्रताकेबादबहुतबड़ीसंख्यामेंएकसाथडा.अम्बेडकरकेनेतृत्वमेंहीमतपरिवर्तनहुआथा। 14 अक्तूबर, 1956 कोनागपुरमेंयहदीक्षासम्पन्नहुई। लेकिन इस धर्म परिवर्तन के तत्कालीन समाज की परिस्थितियाँ रहीं होगीं,जिसके  राजनितिक और  सामाजिक कारण  भी हैं, लेकिन वर्तमान समय में बहुत से लोग केवल धार्मिक विचारों को अहम मानकर बाबासाहेब की विचारधारा को कमजोर क्र रहे हैं और समाज के सामने एक गलत तस्वीर पेश क्र रहे हैं. बाबा साहेब के अनुसार जो भी व्यक्ति समाज विकास में रूचि रखता है तो उन्हें धार्मिक दृष्टिकोण छोड़ कर शैक्षिणक और आर्थिक दृष्टिकोण से सोचना चाहिए . लेकिन आज उल्टा  हो रहा है. धार्मिकता के प्रति संवेदनशील लोग वास्तव में अम्बेडकरवाद के लिए घातक है. इसलिए हमे सामजिक विकास में धार्मिकता को एकतरफ छोड़ना पड़ेगा क्यूंकि यह व्यक्ति का व्यक्तिगत मुद्दा हैं जब भी ये सामाजिक जीवन में प्रवेश करतें हैं  तो मानवता को ही नुकसान पहुंचाते हैं .

धर्म और सामाजिक न्याय

धर्म  समाजकेनिर्माणमेंकभीसहायकहुआहैं और साथ ही अंतर्राष्ट्रीयदृष्टिकोणकेविकासमेंबाधक  है.  धर्मअसहनशीलताऔरघृणाकाभावप्रदर्शनकरसंकीर्णऔरसंकुञ्चितदृष्टिकोणकोआश्रयदेताहै . धर्म  केकारणसमयसमयपरयुद्धहोतेरहेहैं।  मानवकाइतिहासइसकथनकासाक्षीहै. धर्ममनुष्योंकोएकसूत्रमेंबाँधनेके  बजाएउनसेवैमनस्यऔरफूटकाभावभरताहैजिसकेफलस्वरूपशांति  एवंव्यवस्थाकोकायमरखनेमेंकठिनाईहोतीहै. अत: धर्ममनुष्यकीप्रगतिमेंबाधकहै।   धर्म  नेसमाजमेंवर्गवादकासृजनकियाहै।  पूंजीपतियोंकावर्गधर्मकाउपयोगमजदूरवर्गकेशोषणकेलिएकरताहै।  धर्म  व्यक्तिकोमूर्खतातथाअत्याचारसहनकरनेकाउपदेशदेताहै।  धर्मकीउपेक्षाइसलिएभीआवश्यकहैक्योंकियहवैज्ञानिकदृष्टिकोणकीअवहेलनाकरताहै।

नैतिकताकाआधारमानवीयस्वतंत्रताहैलेकिनधर्म मानवीय स्वतन्त्रता को नकारताहै।  संकल्पस्वतंत्रताकेआभावमेंनैतिकताकाकोईमूल्यनहींरहजाता।  आधुनिकयुगमेंधर्मऔरनैतिकताकेबीचविरोधदिखलानेकाप्रयासकियागयाहै. Nitzsche  नेकहाहै “religion  has nothing to do with morality” कुछविचारकोंकेअनुसारनैतिकताधर्मकेबिनाभीसम्भवहै।  एकव्यक्ति  बिनाधार्मिकहुएभीचरित्रवानहोसकताहै।  नीति, धर्मपरआश्रितनहोकरआत्म-निर्भरहै।  इसलिएनैतिकतामेंधर्मकापुटखोजनाअनावश्यकहै।  इसमतकेसमर्थककोम्टे , स्पेंसरतथामिलआदिदार्शनिकहैं. (३)

धर्मपरिवर्तनकेवलसैद्धन्तिकधरातलतककीसम्भवहैउसकोव्यवहारिकधरातलपरसम्भवनहीं मानाजासकतासकता।क्यूंकिधर्मकासंबंधसंस्कृतिसेहोताहैऔरधर्मपरिवर्तनकरनेवालोंकेदोनोंपक्षोंमेंविरोधाभासहोजाताहैजैसेकीहिन्दूधर्मछोड़केईसाईधर्मग्रहणकरनेवालोमेंमिलताहै।  धर्मकासम्बन्धहमारेआंतरिकजीवनसेहोताहै, अत: यहवहींतकहीसम्भव  है.  डॉराधाकृष्णननेभीठीककहाहैकि ” Outer professions have no roots in inner life.” (४) सामाजिकन्यायपानेकीदिशामेंविधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिकाऔरमीडियासहिततमामकेन्द्रोंकेप्रयासकहींनकहींगलतकार्यान्वयनऔरअसंतुलनकेकारणफलीभूतनहींहोपारहेहैं।जरूरतऔरसमयकीमांगहैकिउचितऔरसंतुलितनीतियों -व्यवहारोंकोलागूकियाजायेजिससेकिसामाजिकन्यायकोसामाजिकप्रगतिकाहिस्साबनायाजासके। (५)

डा. भीमराव अम्बेडकर जी एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे जिसमें सभी को न्याय मिलने के साथ-साथ सामाजिक विषमता भी न रहे। संविधान सभा में दिया हुआ भाषण इस बात का साक्षी है-आपका मानना है कि ‘हमने कानून द्वारा राजनीतिक समानता की नींव रख दी है पर यह समानता तभी पूरी तरह से चरितार्थ होगी जब आर्थिक समानता भी देश में स्थापित होगी।(६) इसलिए अगर हम वास्तव में समाज विकास के पक्षधर हैं तो हमें विचारधारा को समग्रता से ग्रहण करना होगा तभी हम वास्तव में बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में सही जगह दे पाएंगे.

संदर्भ :

  1. कृष्णा कांत पाठक, समाज एवं राजनीति दर्शन,  राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी जयपुर , 2012.
  2. सविता पाण्डेय , भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय, http://www.mediabharti.in/news/index.php/2014-03-22-07-39-26/item/78-2014-03-23-12-57-44
  3. याकूब मसीह , धर्म दर्शन की रुपरेखा, मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली , 1998 , पृ. 46
  4. वही,  पृ.३१२
  5. सविता पाण्डेय , भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय , http://www.mediabharti.in/news/index.php/2014-03-22-07-39-26/item/78-2014-03-23-12-57-44
  6. संदीप कुमार सिंह, बीसवीं सदी के महानायक : बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर, http://booksamiksha.blogspot.in/2013/02/0_23.html

Download PDF article from here:

 

Advertisements
टिप्पणियाँ

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s